रामनगरी धार्मिक पर्यटन केंद्र बनने की ओर, विकास को लगे नए पंख CM योगी के नेतृत्व में

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लखनऊ। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद से मानो रामनगरी को विकास के नए पंख लग गए हैं। रामलला की विरासत को संजोने की चाहत की आमजन मंसा को भांप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। योगी सरकार की मंशा इसे आगे चलकर धर्मिक पर्यटन का प्रमुख स्थल बनाने की है। यही कारण है कि वर्ष 2017 में यूपी में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद से ही पिछले तीन वर्षों में सीएम योगी आदित्यनाथ दर्जनों बार अयोध्या गए और वहां रामलला के दर्शन भी किए। उन्होंने तीन बार अयोध्या में दीपोत्सव कार्यक्रम में हिस्सा लिया और फैजाबाद जिले व मंडल का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया।

अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार त्रेतायुग जैसी नई अयोध्या का सपना साकार करने की तैयारी में जुट गई है। सरकार की मंशा इसे धर्मिक पर्यटन का प्रमुख स्थल बनाने की है। अगले तीन वर्षों के भीतर नई अयोध्या न सिर्फ धार्मिक केंद्र होगी बल्कि पर्यटन हब रूप में भी विकसित होगी। यहां विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस कई योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। योजना है कि राममंदिर के समानांतर रामनगरी भी विकसित की जाए। अयोध्या में राममंदिर के साथ ही अयोध्या को विकसित करने का खाका तैयार करने का काम हो रहा है। कुछ योजनाएं जहां तेजी से चल रही हैं और पूरी होने की ओर हैं, तो वहीं कुछ नई योजनाओं से अयोध्या की सूरत बदलने की कवायद तेज हो गई है।

अयोध्या को संजाने-संवारने का काम भी तेज : राममंदिर निर्माण शुरू होने के साथ-साथ अयोध्या को संजाने-संवारने का काम भी तेज हो गया है। यही कारण है कि पयर्टन के क्षितिज पर भी अयोध्या नए आयाम स्थापित करने जा रही है। आकर्षक और विश्वस्तरीय सड़कें, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, सरयू घाटों की भव्यता, भजन संध्या स्थल, रानी हौ पार्क, मल्टीलेवल पार्किंग सहित अन्य योजनाएं रामनगरी की गरिमा को वैश्विक बनाने का काम करेंगी। माना जा रहा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण होने के साथ ही बड़ी संख्या में भक्तों और देशी व विदेशी पर्यटकों का आगमन भी बढ़ेगा। इसलिए यही प्रयास है कि अयोध्या धार्मिक केंद्र होने के साथ-साथ पर्यटन हब भी बने। इसी योजना के तहत पर्यटन विकास की करीब चार सौ करोड़ की योजना पर काम चल रहा है। अयोध्या की सड़कों को विश्वस्तरीय बनाने की कवायद शुरू हो गई है। सरयू घाटों का विस्तार कर उन्हें भव्यता प्रदान किया जाना है। अयोध्या के पंचकोसी एवं चौदहकोसी परिक्रमा मार्ग को यात्री सुविधाओं से आच्छादित किया जा रहा है।

तराशे गए पत्थरों की सफाई में आई तेजी : श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में तराशे गए पत्थरों की सफाई का काम तेज हो गया है। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण को लेकर तकनीकी रूप से तैयारी लगभग पूरी कर ली है। अब दिल्ली की कंस्ट्रक्शन कंपनी केएलए को कार्यशाला में रखे पत्थरों की सफाई का कार्य सौंपा गया है। कंपनी ने कार्य में तेजी लाने के लिए अपनी श्रम शक्ति बढ़ाना शुरू कर दिया है। मंदिर निर्माण कार्यशाला में रखे पत्थरों को साफ करने के लिए कई प्रकार के केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। इनमें कई तरह के रिमूवर प्रयोग में लाए जा रहे हैं। स्टेन, एल्बो सीमेंट, डस्ट रिमूवर और पेंट रिमूवर जैसे केमिकल प्रयोग किए जा रहे हैं।

सफाई में तीन से चार महीने का लगेगा समय : केएलए कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय जेडिया ने बताया कि पत्थरों की सफाई के लिए मुख्य रूप से पानी का प्रयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद अगर पत्थर पर जमी डस्ट और काई साफ नहीं होती तो केमिकल का प्रयोग किया जाता है। जेडिया ने बताया कि कंपनी ने पत्थरों की सफाई का काम पांच श्रमिकों के साथ शुरू किया था। अब दस और श्रमिक दिल्ली से बुलाए गये हैं। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में बड़ी मात्रा में पत्थर रखे हैं। लंबे समय से रखे पत्थरों पर डस्ट जमने की वजह से इन को साफ करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सभी पत्थरों की सफाई करने में तीन से चार महीने का समय लग सकता है। वर्ष 1992 में श्री रामजन्मभूमि न्यास की ओर से मंदिर निर्माण कार्यशाला अयोध्या में स्थापित की गई थी, जहां रामलला का मंदिर बनाने के लिए पत्थरों की तराशी का काम चल रहा था। अब श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निर्देश पर पत्थरों की सफाई का काम दिल्ली की कंस्ट्रक्शन कंपनी केएलए को सौंपा गया है।

251 मीटर श्रीराम की प्रतिमा बढ़ाएगी आकर्षण : रामनगरी अयोध्या में श्रीराममंदिर निर्माण के साथ-साथ 251 मीटर प्रभु श्रीराम की प्रतिमा भी स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सरकार ने 100 करोड़ का बजट भी पहले ही स्वीकृत कर दिया है। पर्यटन अधिकारी आरके यादव ने बताया कि श्रीराम की प्रतिमा के लिए मांझा बरहटा की जमीन का चयन लगभग फाइनल है। शीघ्र ही मूर्ति स्थापना का काम शुरू होगा। बताया कि मूर्ति के बेसमेंट में एक भव्य म्यूजियम भी स्थापित किया जाएगा। इस म्यूजियम में भगवान विष्णु के सभी अवतारों की जानकारी होगी।

बाईपास पर बन रहा आधुनिक बस अड्डा : अयोध्या हाईवे पर आधुनिक बस अड्डे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है। बस अड्डा निर्माण कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। पांच एकड़ में बन रहे बस अड्डे में एक साथ 44 बसें खड़ी हो सकती हैं। इसके साथ ही आधुनिक सुविधाओं से लैस टिकट घर, विश्रामालय जैसे भी निर्माण कार्य लगभग पूरा होने वासे हैं। कार्यदायी संस्था यूपी राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि मार्च 2021 तक बस अड्डा बनकर तैयार हो जाएगा। निकट भविष्य में बस अड्डे के विस्तारीकरण की भी योजना है।

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