चेन्नई में पल्स पोलियो टीकाकरण: चिंता का विषय या समाधान की राह?

चेन्नई में पल्स पोलियो अभियान के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के टीकाकरण में आई कमी चिंता का विषय है। तमिलनाडु के बाकी हिस्सों की तुलना में चेन्नई में 2024 की शुरुआत में हुए गहन पल्स पोलियो टीकाकरण (IPPI) अभियान में पांच साल से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण कम रहा, जबकि राज्य में कुल मिलाकर मौखिक पोलियो टीके (OPV) का अच्छा कवरेज रहा। यह बात जन स्वास्थ्य निदेशालय (DPH) और निवारक चिकित्सा द्वारा किए गए एक त्वरित मूल्यांकन में सामने आई है। इस मूल्यांकन से शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण में अंतराल और लक्षित समुदाय संपर्क की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

चेन्नई में पल्स पोलियो टीकाकरण में कमी के कारण

शहरी क्षेत्रों में चुनौतियाँ

चेन्नई में पल्स पोलियो टीकाकरण में कमी के कई कारण हैं। शहरी क्षेत्रों में कई चुनौतियां हैं जो टीकाकरण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को बाधित करती हैं। उच्च इमारतें और बड़ी आबादी वाली बस्तियाँ ऐसी जगहें हैं जहाँ स्वास्थ्य कर्मी आसानी से पहुँच नहीं पाते हैं। कई लोगों को टीकाकरण अभियान की जानकारी तक नहीं होती है या वे जागरूक नहीं होते हैं। ये कारण टीकाकरण में कमी का बड़ा हिस्सा बनते हैं।

जागरूकता की कमी और अभियान की जानकारी

अभियान के बारे में जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है। कई माताओं को अभियान की तारीख, स्थान या महत्व के बारे में जानकारी नहीं थी, जिसकी वजह से उनके बच्चों को टीका नहीं लग पाया। इसका समाधान प्रभावी संचार और जागरूकता अभियान द्वारा किया जा सकता है।

बच्चों की बीमारी और अन्य कारण

बच्चों की बीमारी भी एक महत्वपूर्ण कारण है। सर्वेक्षण में 30% माताओं ने यह कारण बताया। इसके अलावा, राज्य से बाहर रहना और अन्य कारणों ने भी टीकाकरण कवरेज में कमी लाने में योगदान दिया।

तमिलनाडु में IPPI अभियान 2024 का मूल्यांकन

तमिलनाडु में 3 मार्च 2024 को आयोजित IPPI अभियान ने 0 से 5 साल के 59.20 लाख बच्चों को कवर किया। इसके बाद एक टेलीफोनिक सर्वेक्षण किया गया जिसने 1200 माताओं (चेन्नई से 75 और अन्य जिलों से 25) से संपर्क किया गया। इस सर्वेक्षण से पता चला कि 101 बच्चों (8.6%) को टीका नहीं लगाया गया था, जिनमे से 21% चेन्नई से थे।

सर्वेक्षण में सामने आए आंकड़े

सर्वेक्षण में पाया गया कि अधिकांश बच्चों (91.3%) को आईसीडीएस-आंगनवाड़ी केंद्रों में टीका लगाया गया था। बच्चों के टीकाकरण न होने के प्रमुख कारणों में बच्चों की बीमारी (30%), राज्य के बाहर रहना (29%) और अभियान के बारे में जानकारी का अभाव (23%) शामिल थे।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष

सर्वेक्षण ने आईसीडीएस-आंगनवाड़ी केंद्रों की टीकाकरण केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि की। इसने चेन्नई जैसे क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज में असमानता को दूर करने के महत्व पर भी जोर दिया जहाँ टीकाकरण न होने का दर उच्च था।

टीकाकरण कवरेज को बेहतर बनाने के उपाय

लक्षित समुदाय संपर्क

शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज में सुधार के लिए लक्षित समुदाय संपर्क बेहद जरूरी है। यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी समुदायों तक, खासकर हाशिये पर रहने वाले और पहुंच से वंचित समुदायों तक, टीकाकरण अभियान की जानकारी पहुंचे।

प्रभावी संचार और जागरूकता

टीकाकरण कार्यक्रम के बारे में प्रभावी संचार और जागरूकता के माध्यम से माताओं और परिवारों में जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए। यह टीकाकरण के लाभों के बारे में स्पष्ट संदेशों और अभियान की तारीखों और स्थानों के बारे में जानकारी देने से किया जा सकता है।

अभियान में बेहतर पहुंच

टीकाकरण टीमों की पहुँच बढ़ाने की जरूरत है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां घनी आबादी है या बुनियादी ढाँचा कमजोर है। मोबाइल टीकाकरण क्लीनिक इस समस्या के समाधान में मदद कर सकते हैं।

अनुपस्थित बच्चों के लिए वैकल्पिक प्रावधान

उन बच्चों के लिए वैकल्पिक प्रावधान करने होंगे जो टीकाकरण के दिन अनुपस्थित रहते हैं। यह बाद के दिनों में विशेष टीकाकरण शिविर आयोजित करके या बच्चों के घर जाकर टीका लगाकर किया जा सकता है।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है की चेन्नई में पल्स पोलियो टीकाकरण में आई कमी चिंताजनक है परंतु प्रभावी योजनाओं और कारगर उपायों द्वारा इस समस्या का समाधान संभव है।

मुख्य बातें:

  • चेन्नई में पल्स पोलियो टीकाकरण का कवरेज कम रहा।
  • शहरी क्षेत्रों में कई चुनौतियाँ टीकाकरण को प्रभावित करती हैं।
  • जागरूकता की कमी और अभियान के बारे में जानकारी का अभाव प्रमुख कारण हैं।
  • बच्चों की बीमारी और राज्य से बाहर रहना भी कारणों में शामिल हैं।
  • लक्षित समुदाय संपर्क और प्रभावी संचार कवरेज को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

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