गाजियाबाद। सुंदरभाटी गैंग के बदमाश गिरफ्तार न होते तो जल्द ही गाजियाबाद की कचहरी में ‘खूनी खेल’ खेलते। इसके लिए कार्बाइन से लेकर सेमी ऑटोमेटिक तीन पिस्टल और बड़ी मात्रा में कारतूस जुटा लिए गए थे। हत्या होनी थी डासना जेल में बंद सौरभ की। 2015 में मुजफ्फरनगर कचहरी में हुई कुख्यात विक्की त्यागी की हत्या में शामिल सौरभ से बदला लेने के लिए विक्की के बेटे अर्पित ने पूरी तैयारी की थी। इसके अलावा संदीप बली की हत्या भी गाजियाबाद में ही की जाने की प्लानिंग थी।
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए बदमाश अमर, डीके उर्फ धर्मेंद्र, अर्पित त्यागी, कुलदीप और अनुज उर्फ गट्टू सौरभ और संदीप बली की हत्या की फिराक में लंबे समय से थे। चार माह पूर्व संदीप बली की गाजियाबाद कचहरी में तारीख थी। उसकी हत्या के लिए पांचों बदमाश कचहरी में हथियार लेकर पहुंच गए थे, लेकिन संदीप पेशी पर नहीं आया। पुलिस के मुताबिक जल्द ही वह कचहरी में सौरभ की हत्या करने वाले थे। पुलिस सूत्रों की मानें तो उनके पास ऐसे हथियार मौजूद हैं कि एक ही बार में वह 100 से ज्यादा राउंड फायरिंग कर सकते हैं। यानी एक बार किसी पर हमला करे तो उसका बचना नामुमकिन था।
पकड़े गए बदमाश पुलिस पर भी गोली चलाने में नहीं हिचकिचाते। उन्होंने पूर्व में कुरुक्षेत्र में भी पुलिस पर जानलेवा हमला किया था। पकड़े गए बदमाशों का कहना है कि अब मुठभेड़ में उन्हें वक्त मिलता तो वह पुलिस पर हमला कर देते, लेकिन कभी उनके कब्जे में न आते।
इंजीनियरिंग और कामर्स की पढ़ाई करने के बावजूद महज 24 से 29 साल के युवा दिल में सुलग रही बदले की चिंगारी के चलते जरायम की दुनिया में उतर आए। उन्होंने ऐसा गैंग तैयार कर लिया जो पहले अपने करीबियों की हत्याओं का बदला लेने के लिए विरोधियों की जान लेने की तैयारी कर रहा था। इनके निशाने पर डासना जेल में बंद एक हत्यारोपी सौरभ और दो अन्य बदमाश सागर और कुलदीप थे।
पुलिस के मुताबिक सुंदर भाटी का शार्प शूटर और एक लाख के इनामी बदमाश अमर मूंछ उर्फ फौजी के ताऊ के लड़के की हत्या पूर्व में चिपियाना गांव के पास कुलदीप नाम के एक युवक ने कर दी थी। भाई की हत्या का बदला लेने के लिए अमर करीब चार साल पूर्व अपराध की दुनिया में उतर आया और देवेंद्र के जरिए सुंदर भाटी गैंग से जुड़ गया। पावटी मुजफ्फरनगर का रहने वाला अर्पित त्यागी भी अपने पिता विक्की त्यागी की हत्या का बदला लेने के लिए जरायम की दुनिया में उतर गया।
विक्की त्यागी की फरवरी 2015 में पेशी के दौरान मुजफ्फरनगर कचहरी में दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इसमें वबावड़ी निवासी सौरभ और सागर का नाम आया था। उनसे बदला लेने के लिए अर्पित भी अमर और देवेंद्र के गैंग से जुड़ गया। अर्पित ने ही अपने पिता विक्की की कार्बाइन उन्हें दी थी। इसका इस्तेमाल भाजपा नेता शिवकुमार की हत्या में भी किया गया था। फिलहाल अर्पित के साथ अमर और डीके उर्फ धर्मेंद्र भी गैंग में शामिल हो गए थे।
एसएसपी वैभव कृष्ण के मुताबिक हरियाणा के भदौली निवासी कुलदीप और अनुज ने मई 2018 में पंजाब के युवा गायक नवजोत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसकी हत्या मोहाली पंजाब के पास कार लूट का विरोध करने पर की गई थी। कुलदीप ने नवजोत को चार-पांच गोलियां मारी थीं। इसके अलावा दोनों ने बराड़ा अंबाला में विवेक नाम के एक व्यक्ति का अपहरण कर डेरा बस्सी पंजाब में जाकर हत्या कर दी थी। उसे आठ गोलियां मारी गई थीं। दोनों ने थाना नारायणगढ़ अंबाला में दिनदहाड़े एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पुलिस के मुताबिक कुलदीप और अनुज उर्फ गट्टू भी हरियाणा के एमआर गैंग (मोनू राणा) के शॉर्प शूटर हैं। गैंग के लीडर मोनू राणा पर एक लाख रुपये का इनाम है। इस गैंग में नीरज गांधी, गौतम राणा, अमर राणा, अमित मलिक, पंकज मलिक, काला, विनय, शक्ति राणा, सचिन राणा और अजय पिलखनी शामिल हैं। उनकी बीआर गैंग (भूपेंद्र राणा) गैंग से गैंगवार चल रही है। भूपेंद्र पर पांच लाख रुपये का इनाम है। एमआर गैंग में शामिल कुलदीप और अनुज ने दिल्ली, यूपी और हरियाणा में कई वारदातों को अंजाम दिया है।
एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि मुठभेड़ के बाद सुंदर भाटी गैंग के कुख्यात बदमाशों की गिरफ्तारी करने वाले क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर दिनेश यादव, सिहानीगेट इंस्पेक्टर संजय पांडेय और उनकी टीम को डीजीपी की ओर से 75 हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा उन्हें बदमाशों पर घोषित डेढ़ लाख की रकम भी दी जाएगी।
पुलिस की मानें तो सुंदर भाटी पढ़े-लिखे युवाओं को गैंग में शामिल कर रहा है। उसका टारगेट ऐसे युवा रहते हैं, जिनके परिवार में कोई रंजिश चल रही हो। ऐसे युवाओं को बदला लेने के लिए उकसाकर गैंग में शामिल किया जाता है। उन्हें पुलिस से बचाने का भी भरोसा दिलाया जाता है। हत्या या लूट जैसी वारदातों को अंजाम देने वाले युवाओं की फरारी काटने का इंतजाम सुंदर भाटी गैंग के अन्य सदस्य करते हैं। इसी तरह सुंदर का गैंग बड़ा होता जा रहा है।
पुलिस की मानें तो अमर और उसके साथी इतने शातिर थे कि बिना सिम के फोन से व्हॉट्सएप कॉल पर बात करते थे। इससे वह आसानी से ट्रेस नहीं हो पाते थे। व्हॉट्सएप वह वाई-फाई या हॉट स्पॉट से चलाते थे।
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