क्या आप जानते हैं कि अरविंद केजरीवाल महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे? लेकिन, क्या यह प्रचार सभी ‘इंडिया’ दलों के उम्मीदवारों के लिए होगा, या फिर इसमें कोई राजनीतिक चाल है? आइये जानते हैं इस राजनीतिक पहेली को!
केजरीवाल का ‘इंडिया’ गठबंधन में दांव
महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) भले ही सीधे तौर पर चुनाव नहीं लड़ रही हो, लेकिन अरविंद केजरीवाल का प्रचार-प्रसार काफ़ी ज़ोरदार होने वाला है। सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल कुछ चुनिंदा दलों के लिए ही प्रचार करेंगे। क्या इस रणनीति में कांग्रेस को किनारे किया जा रहा है? क्या केजरीवाल अपना अलग गुट बना रहे हैं ‘इंडिया’ के अंदर? ये सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिवसेना (उद्धव), एनसीपी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ प्रचार की बात
ख़बरों के मुताबिक़, केजरीवाल ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), एनसीपी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए प्रचार करने की सहमति दे दी है। क्या यह एक संकेत है कि AAP कांग्रेस के साथ दूरी बनाना चाहती है? या फिर ये महज़ एक रणनीतिक कदम है?
क्या कांग्रेस को किया जा रहा है नज़रअंदाज़?
यह सवाल ज़रूर उठता है कि अगर केजरीवाल सिर्फ़ इन तीन दलों के लिए प्रचार करेंगे, तो क्या कांग्रेस को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है? अगर कोई कांग्रेस उम्मीदवार केजरीवाल को प्रचार के लिए आमंत्रित करता है, और वह मना कर देता है, तो यह सब स्पष्ट हो जाएगा। लेकिन क्या ऐसा होगा? क्या केजरीवाल की इस रणनीति में कोई छिपा हुआ मकसद है?
केजरीवाल और कांग्रेस: पुराना तनाव
AAP और कांग्रेस के रिश्ते हमेशा से ही तनावपूर्ण रहे हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान दोनों दलों के नेताओं ने एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने की कोशिश की। अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी का एक साथ मंच साझा करना भी दुर्लभ रहा।
क्या केजरीवाल राहुल गांधी को चुनौती दे रहे हैं?
लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी ने काफ़ी अच्छी भूमिका निभाई है। उनका कद बढ़ा है। केजरीवाल क्या अब अपनी राजनीतिक पहचान और प्रभाव बढ़ाने के लिए राहुल गांधी को चुनौती दे रहे हैं? इस नए प्रचार अभियान में कांग्रेस को किनारे करने का मतलब क्या है? क्या इससे ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर ही गुटबाज़ी पैदा हो सकती है?
दिल्ली में भी दिखेगा यही अंदाज़?
क्या यह रणनीति सिर्फ़ महाराष्ट्र और झारखंड तक ही सीमित रहेगी, या फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी केजरीवाल का यही रवैया होगा? क्या दिल्ली में भी वह कांग्रेस के साथ दूरी बनाए रखेंगे? ये अहम सवाल हैं जिसके जवाब आने वाले समय में मिल सकते हैं।
क्या है केजरीवाल की असली रणनीति?
केजरीवाल की इस रणनीति के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है वो अपने लिए ज़्यादा जगह बनाना चाहते हों ‘इंडिया’ गठबंधन में। शायद वह किसी अन्य गुट को भी मजबूत करने की कोशिश में हों। या फिर यह महज़ एक राजनीतिक कदम हो जिसका असली मकसद बाद में पता चलेगा।
एक नयी राजनीतिक गुटबंदी का संकेत?
यह भी संभावना है कि केजरीवाल ‘इंडिया’ गठबंधन के अंदर एक नया गुट बनाना चाहते हों। इस रणनीति के ज़रिये वह भविष्य में अपनी राजनीतिक ताक़त का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।
टेक अवे पॉइंट्स
- अरविंद केजरीवाल महाराष्ट्र और झारखंड में ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे।
- लेकिन, प्रचार का दायरा सीमित हो सकता है, जिसमें कांग्रेस को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है।
- केजरीवाल और कांग्रेस के बीच पुराना तनाव अभी भी बना हुआ है।
- केजरीवाल की इस रणनीति से ‘इंडिया’ गठबंधन के अंदर गुटबाज़ी की संभावना बढ़ सकती है।
- दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी केजरीवाल की यही रणनीति काम में आ सकती है।

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