अलीगढ़, आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति दिए जाने के विरोध में निजी चिकित्सकों की देशव्यापी हड़ताल शुरू हो गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं बंद कर दी हैं। पैथोलाॅजी लैब व अल्ट्रासाउंड सेंटर भी बंद हो गए हैं। चिकित्सकों का तालानगरी स्थित आइएमए भवन में धरना चल रहा है। इससे दूर-दराज से आए मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। न तो उन्हें इलाज मिल रहा है और न जरूरी जांच हो पा रही हैं। गनीमत ये है कि इमरजेंसी व कोविड सेवाएं जारी रखी गई हैं। निजी चिकित्सकों के ओपीडी ने करने से सरकारी अस्पतालों की अोपीडी में सामान्य से अधिक भीड़ लगी हुई है। उधर, आयुष चिकित्सक हड़ताल का विरोध कर रहे हैं।
मरीज नर्सिंग होम से लौटे
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपनी पूर्ण घोषणा के तहत सुबह छह बजे से ही हड़ताल शुरू कर दी। इस समय केवल गंभीर मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। कर्मचारी अन्य मरीजों को बाहर से लौटा रहे हैं। इससे मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, फिर भी उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है। कुछ मरीजों ने जिला अस्पताल का रुख किया है, मगर वहां काफी भीड़ होने के कारण तमाम मरीज बिना इलाज के घर लौट गए। निजी चिकित्सकों के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने से इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित हैं, हालांकि इलाज के इंतजाम किए गए हैं।
सरकार कर रही मजबूर
तालानगरी स्थित आइएमए भवन में सुबह करीब 10 बजे से ही चिकित्सकों का तांता लगना शुरू हो गया। आइएमए के स्टेट सेक्रेट्री डाॅ. जयंत शर्मा ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में बदलाव से आयुर्वेदिक डॉक्टरों को भी आपरेशन करने का अधिकार दिया जा रहा है। इसके साथ ही सभी विधा के डाक्टरों को एमबीबीएस की डिग्री दी जाएगी। इससे एलोपैथ, आयुर्वेद, होम्योपैथ में अंतर करना मुश्किल हो जाएगा। नई चिकित्सा व्यवस्था से गंभीर मरीजों को भी परेशानी का सामना कर पड़ सकता है । जिले के अध्यक्ष डॉ. विपिन गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार की इस नई नीति से मेडिकल शिक्षा व इलाज में खिचड़ी तंत्र विकसित हो जाएगा, जो मरीजों को नुकसान व देश के डॉक्टरों की छवि धूमिल करेगा। हम नहीं चाहते थे कि हड़ताल हो, क्योंकि इससे मरीजों को परेशान होना पड़ेगा। अफसोस, सरकार ने चिकित्सकों की चिंता व आपत्ति कोे दरकिनार कर हमें हड़ताल के लिए मजबूर कर दिया है। पूरे देश का डाॅक्टर सरकार के इस फैसले से नाराज है। निजी चिकित्सक सरकार के इस फैसले को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगी। सरकारी हॉस्पीटल का रखें रुख।
शाम को आगे का फैसला
सचिव डाॅ. भरत वार्ष्णेय ने बताया कि आठ दिसंबर को दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल के माध्यम से सरकार को चेताया गया है, मगर कोई पहल नहीं हुई। सरकार चाहती थी तो मरीजों को परेशानी से बचा सकती थी। यह फैसला लागू हो गया तो एलोपैथ व झोलाछाप में कोई अंतर नहीं बचेगा। हमारे अस्पातलों में तमाम मरीज ऐसे आते हैं, जो झोलाछापों से इलाज कराकर अपनी बीमारी को और बढ़ा चुके होते हैं। यदि आॅपरेशन के लिए कुछ माह का कोर्स करके आयुर्वेद या होम्योपैथ का कोई जानकार योग्य हो सकता है तो फिर कोई एमबीबीएस-एमएस क्यों करेगा। आयुर्वेद की डिग्री लेकर हाॅस्पिटल खोल लेगा। सरकार का यह फैसला किसी के हित में नहीं हैं।
शहर में ज्यादा, देहात में कम असर
चिकित्सकों की हड़ताल का असर शहर में ज्यादा दिखाई दे रहा है। देहात में ज्यादातर क्लीनिक, नर्सिंग होम, हाॅस्पिटल, लैब, अल्ट्रासाउंड सेंटर खुले हुए हैं। शहर में भी कुछ डाॅक्टर गुपचुप ढंग से ओपीडी से वाएं दे रहे हैं। हड़ताल में शामिल डाॅक्टरों का कहना है कि इसे आइएमए की बजाय खुद का आंदोलन समझें।
आयुष चिकित्सकों ने मनाया धन्यवाद
एलोपैथ चिकित्सकों की हड़ताल के विरोध में आयुष चिकित्सकों के संगठन नीमा के आह्वान पर धन्यवाद दिवस मनाया गया। इस दौरान आयुष चिकित्सकों ने बेहत रियायती दरों पर मरीज देख। बाजू पर लाल-गुलाबी रिबिन बांधकर कार्य किया। अध्यक्ष वाईके गुप्ता व सचिव डाॅ. विश्वमित्र आर्य ने बताया कि हमारे चिकित्सक पूरे शिद्दत से मरीजों के इलाज में जुटे हैं। इससे मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं।
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